भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल रुपया (e-Rupee) का सफल पाइलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। 2026 तक यह डिजिटल करेंसी पूरे भारत में लागू होने की संभावना है। डिजिटल रुपया कागजी नोटों के समान ही काम करेगा, लेकिन डिजिटल रूप में।
डिजिटल रुपया दो प्रकार का होगा – रिटेल (R-CBDC) और होलसेल (W-CBDC)। रिटेल संस्करण आम नागरिकों के लिए होगा, जबकि होलसेल संस्करण बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच लेन-देन के लिए उपयोग होगा।
डिजिटल रुपये से कैश लेन-देन की जरूरत कम होगी। इससे नकली नोटों की समस्या कत्म होगी और ग्रामीण इलाकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचेंगी। किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यापारियों को भी इसका बड़ा फायदा होगा।
UPI की सफलता के बाद डिजिटल रुपया भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई उँचाई देगा। अन्य देश भी भारत के अनुभव से सीख रहे हैं। डिजिटल रुपया को सीमा पार लेन-देन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिजिटल रुपया देश की अर्थव्यवस्था को और पारदर्शी और सुदृढ़ बनाएगा। भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में विश्व नेता बनने की राह पर है। आने वाले कुछ वर्षों में डिजिटल रुपया हमारी लेन-देन प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन जाएगा।